खरोष्ठी लिपि का वर्णन करें |

खरोष्ठी लिपि का वर्णन करें | उत्तर : खरोष्ठी लिपि एक प्राचीन लिपि है जिसका उपयोग प्राचीन गांधार (वर्तमान अफगानिस्तान एवं पाकिस्तान) में गांधारी प्राकृत एवं संस्कृत लिखने हेतु किया जाता था । यह ब्राह्मी की सहयोगी लिपि है जिसे दायें से बायें की ओर लिखा जाता था । इस लिपि को सर्वप्रथम जेम्स प्रिंसेप … Read more

ब्राह्मी लिपि का वर्णन करें |

ब्राह्मी लिपि का वर्णन करें | उत्तर : ब्राह्मी लिपि एक प्राचीन लिपि है जिससे कई एशियाई लिपियों का विकास हुआ । देवनागरी सहित अन्य दक्षिण एशियाई, दक्षिण-पूर्व एशियाई, तिब्बती तथा कुछ लोगों के अनुसार कोरियाई लिपि का विकास भी ब्राह्मी लिपि से हुआ । ब्राह्मी लिपि को वर्तमान समय में हमें परिचित कराने का … Read more

सिन्धु सरस्वती सभ्यता का धार्मिक जीवन

सिन्धु सरस्वती सभ्यता का धार्मिक जीवन पुरातात्विक साक्ष्यों के आधार पर यह अनुमान लगाया जाता है कि सैंधव लोगों की धर्म में अत्यधिक आस्था थी । सिन्धु सभ्यता के लोगों का धार्मिक जीवन पर्याप्त उन्नत था । इस सभ्यता की धार्मिक जीवन सम्बन्धी विशेषताएँ निम्नलिखित थी-

सिन्धु सरस्वती सभ्यता का आर्थिक जीवन

सिन्धु सरस्वती सभ्यता का आर्थिक जीवन उत्खनन द्वारा प्राप्त किये गये भग्नावशेषों से ज्ञात होता है कि सिन्धु सभ्यता के निवासियों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ थी। यद्यपि समृद्धि प्राप्त करने हेतु उन्होंने विभिन्न साधनों का प्रयोग किया था, किन्तु कृषि ही सर्वप्रमुख साधन प्रतीत होता है।’ तत्कालीन आर्थिक जीवन का वर्णन निम्नवत् है :-                        … Read more

सिन्धु सरस्वती सभ्यता का सामाजिक जीवन

उत्खनन से प्राप्त अवशेषों से सिन्धु सभ्यता की सामाजिक स्थिति का ज्ञान होता है कि यहाँ मातृसत्तात्मक व्यवस्था थी । अवशेषों से प्राप्त भवनों के विभिन्न प्रकार यह दर्शाते हैं कि सिन्धुकालीन समाज में पुरोहित, व्यापारी, शिल्पकार और श्रमिक महत्त्वपूर्ण भूमिका रखते थे । इस सभ्यता की सामाजिक जीवन सम्बन्धी विशेषताएँ निम्नलिखित थीं-

मिस्र सभ्यता की कला

मिस्र सभ्यता की कला (Art of Egyptian Civilisation)  1) मूर्ति कला 2) चित्रकला 3) ममी बनाने की कला 4) लेखन कला   मूर्ति कला (Sculpture Art ) मिस्र सभ्यता में मूर्तिकला के क्षेत्र में आश्चर्यजनक उन्नति हुई थी । मिस्र के लोगों द्वारा निर्मित फराओं की 60 फुट से अधिक ऊँची पत्थर की मूर्तियों को … Read more

बेबीलोनिया सभ्यता : शिक्षा

बेबीलोनिया सभ्यता : शिक्षा बेबीलोनिया सभ्यता में शिक्षा का मुख्य उद्देश्य प्रशासन, धर्म और व्यापार से जुड़े कुशल व्यक्तियों का निर्माण करना था । शिक्षा विशेष रूप से उच्च वर्ग के लोगों, पुजारियों, और सरकारी अधिकारियों के लिए थी । बच्चों को लिखने, पढ़ने और गणित सिखाने के लिए एडुब्बा (Edubba) नामक विद्यालय होते थे, … Read more

बेबीलोनिया सभ्यता : प्रशासन

बेबीलोनिया सभ्यता : प्रशासन बेबीलोनिया सभ्यता का प्रशासन अत्यंत संगठित और शक्तिशाली था। राजा प्रशासन का सर्वोच्च प्रमुख होता था और उसे देवताओं का प्रतिनिधि माना जाता था। राजा के अधीन विभिन्न अधिकारी होते थे, जो कर संग्रह, न्याय व्यवस्था और सैन्य संचालन का कार्य संभालते थ। राज्य को प्रांतों में विभाजित किया गया था, … Read more

बेबीलोनिया सभ्यता : कला और स्थापत्य

बेबीलोनिया सभ्यता : कला और स्थापत्य बेबीलोनिया सभ्यता की कला और स्थापत्य अत्यंत विकसित और सुंदर थी । इसकी कला में मूर्तिकला, भित्ति चित्र, धातु कार्य और टाइलों की सजावट महत्वपूर्ण थीं । बेबीलोनियाई मूर्तियों में प्रमुख रूप से देवताओं, राजाओं और सैनिकों की आकृतियाँ उकेरी जाती थीं । भित्ति चित्रों और टाइलों का उपयोग … Read more

बेबीलोनिया सभ्यता : कानून

बेबीलोनिया सभ्यता का कानून अत्यंत संगठित और न्यायसंगत था । इस सभ्यता की न्याय व्यवस्था को औपचारिक रूप देने का श्रेय राजा हम्मुराबी (1792-1750 ईसा पूर्व) को जाता है, जिन्होंने विश्व की पहली लिखित कानून संहिता तैयार की । इसे हम्मुराबी की संहिता (Code of Hammurabi) कहा जाता है, जिसमें 282 कानून शामिल थे । … Read more