न्याय स्वतन्त्रता तथा समानता में पारस्परिक सम्बन्ध स्थापित कीजिए । 

न्याय स्वतन्त्रता तथा समानता में पारस्परिक सम्बन्ध स्थापित कीजिए । 

प्रश्न – न्याय स्वतन्त्रता तथा समानता में पारस्परिक सम्बन्ध स्थापित कीजिए ।  स्वतंत्रता और समानता दोनों का लक्ष्य एक न्यायपूर्ण स्थिति को प्राप्त करना है और इस दृष्टि से स्वतंत्रता और समानता को न्याय का महत्त्वपूर्ण अंग समझा जाता है। वैसे तो, स्वतंत्रता और समानता एक-दूसरे के पूरक हैं, लेकिन किसी विशेष स्थिति में इन … Read more

न्याय के कानूनी, राजनीतिक एवं सामाजिक पहलू का वर्णन करें। 

न्याय के कानूनी, राजनीतिक एवं सामाजिक पहलू का वर्णन करें। 

प्रश्न – न्याय के कानूनी, राजनीतिक एवं सामाजिक पहलू का वर्णन करें।  न्याय एक ऐसी जटिल अवधारणा है जिसके कई पक्ष अथवा क्षेत्र हैं, जो आपस में घनिष्टत: सम्बंधित हैं। न्याय के मुख्य पहलू हैं-कानूनी, राजनीतिक, सामाजिक एवं आर्थिक पहलू। न्याय के इन पहलुओं में कानूनी पहलू अत्यंत महत्वपूर्ण है।  न्याय का कानूनी क्षेत्र अथवा … Read more

न्याय क्या है ? न्याय की प्रमुख विशेषताओं पर प्रकाश डालिए। 

न्याय क्या है ? न्याय की प्रमुख विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।

प्रश्न – न्याय क्या है ? न्याय की प्रमुख विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।  ‘‘न्याय सामाजिक जीवन की वह व्यवस्था है, जिसमें व्यक्ति के आचरण का समाज के कल्याण के साथ समन्वय स्थापित किया गया है। ‘  व्यक्ति स्वभाव से स्वार्थी होता है। वह सदैव अपने हित को अग्रसर करना चाहता है। यदि उसका आचरण, समाज … Read more

असमानता के प्रभाव एवं इसे दूर करने के उपायों का वर्णन कीजिए। pdf Download

असमानता के प्रभाव एवं इसे दूर करने के उपायों का वर्णन कीजिए। 

प्रश्न – असमानता के प्रभाव एवं इसे दूर करने के उपायों का वर्णन कीजिए।  समाज में भिन्नता का होना स्वाभाविक है, लेकिन जब यह विभिन्नता भिन्नतापूर्ण व्यवहार और असमानता का कारण बनती है, जो यह समाज के हाशिए पर पड़े समूहों के लिए हानिकारक हो जाती है। हाशिए पर पड़े समूहों में वे लोग शामिल … Read more

असमानता (विषमता) का अर्थ स्पष्ट करें एवं इसकी विशेषताओं का वर्णन करें। 

असमानता (विषमता) का अर्थ स्पष्ट करें एवं इसकी विशेषताओं का वर्णन करें। 

प्रश्न – असमानता (विषमता) का अर्थ स्पष्ट करें एवं इसकी विशेषताओं का वर्णन करें।  समता के विपरीत विषमता ( Inequality) का अर्थ है – व्यक्तियों को अपने व्यक्तित्व के पूर्ण विकास का समान अवसर प्राप्त नहीं होना, समाज में विशेषाधिकारों का पाया जाना, जन्म, जाति, प्रजाति, व्यवसाय, धर्म, भाषा, आय व सम्पत्ति के आधार पर … Read more

भारतीय संविधान में वर्णित समानता के अधिकार को स्पष्ट करें।

भारतीय संविधान में वर्णित समानता के अधिकार को स्पष्ट करें।

प्रश्न – भारतीय संविधान में वर्णित समानता के अधिकार को स्पष्ट करें। समानता का अधिकार ( अनुच्छेद 14 से 18 अनुच्छेद) : समानता लोकतन्त्र का एक प्रमुख सिद्धान्त है। समानता के अभाव में वास्तविक रूप से लोकतन्त्रात्मक शासन की स्थापना होनी असम्भव है। अतः भारतीय संविधान में समानता सम्बन्धी अधिकारों का विस्तृत वर्णन किया गया … Read more

समानता के विभिन्न आयामों की संक्षिप्त विवेचना करें।

समानता के विभिन्न आयामों की संक्षिप्त विवेचना करें।

प्रश्न – समानता के विभिन्न आयामों की संक्षिप्त विवेचना करें। समानता की अवधारणा समय की प्रगति के साथ परिवर्तित होती रही है। इसके अनुसार राजनीतिक चिंतक भी इसके परिवर्तित आयामों का विश्लेषण करते रहे हैं। ब्राइस ने इसके नागरिक, राजनीतिक, सामाजिक तथा प्राकृतिक आयामों पर जोर दिया है, तो वार्कर ने सामाजिक तथा कानूनी आयामों … Read more

समतावाद क्या है ? इसके उद्देश्यों का वर्णन कीजिए। समाज में असमानताओं और भिन्नतापूर्ण व्यवहार के सन्दर्भ में इसकी भूमिका पर चर्चा करें।

समतावाद क्या है ? इसके उद्देश्यों का वर्णन कीजिए। समाज में असमानताओं और भिन्नतापूर्ण व्यवहार के सन्दर्भ में इसकी भूमिका पर चर्चा करें।

प्रश्न – समतावाद क्या है ? इसके उद्देश्यों का वर्णन कीजिए। समाज में असमानताओं और भिन्नतापूर्ण व्यवहार के सन्दर्भ में इसकी भूमिका पर चर्चा करें। समतावाद, जिसे अंग्रेजी में “Egalitarianism” कहा जाता है, एक ऐसी सामाजिक और राजनीतिक अवधारणा है जो सभी व्यक्तियों के साथ समानता और निष्पक्षता की वकालत करती है। यह सिद्धांत मानता … Read more

‘स्वतंत्रता और समानता एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक हैं।’ स्पष्ट करें। 

'स्वतंत्रता और समानता एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक हैं।' स्पष्ट करें। 

प्रश्न – ‘स्वतंत्रता और समानता एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक हैं।’ स्पष्ट करें।  स्वतंत्रता और समानता प्रजातंत्र के दो मूल आधार स्तम्भ हैं। स्वतंत्रता समाज- कल्याण के हित में व्यक्ति का वह मर्यादित अधिकार है जिसके अभाव में वह अपने जीवन का सर्वमुखी विकास नहीं कर सकता। अर्थात् समाजहित में अपने को … Read more

समानता के अर्थ की ब्याख्या कीजिए तथा इसके प्रकारों की विवेचना कीजिए।

समानता के अर्थ की ब्याख्या कीजिए तथा इसके प्रकारों की विवेचना कीजिए।

प्रश्न- समानता के अर्थ की ब्याख्या कीजिए तथा इसके प्रकारों की विवेचना कीजिए।  साधारण रूप से समानता का अर्थ समस्त व्यक्तियों का समान दर्जा माना जाता है। यह कहा जाता है कि सभी का जन्म-मरण होता है, सभी की एक-सी इन्द्रियाँ होती हैं, अतः ऊँच-नीच, धनी – निर्धन, रंग आदि में भेद नहीं होना चाहिए … Read more